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सांस्कृतिक विविधता और शिक्षणशास्त्र

धनकर, रोहित

FormatEbook
Published2009
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख कक्षा में मौजूद धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई, वर्गीय, जातीय और लैंगिक आदि विविधताओं के महत्त्व को रेखांकित करता है। लेख बताता है कि शिक्षक के नजरिये से यह तय हो जाता है कि ये विविधताएँ सीखने को और लोकतांत्रिक बनाएँगी या सीखने में बाधा पैदा करेंगी। लेख यह भी बताता है कि विविधताओं को नज़रंदाज़ करने से यथास्थिति बनी रहती है, वहीं यदि शिक्षक का नजरिया सम्वेदनशील हो तो विविधताओं के जरिये सामाजिक भिन्नता को पाटने में मदद मिल सकती है।

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