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समानता

मदान, अमन

FormatEbook
Published2006
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
मनुष्य में समानता के भाव को हमेशा से सराहा गया है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो 250 साल पूर्व शुरू हुए औद्योगिकीकरण के दौर से बड़ी तादाद में लोगों को प्रेरित और उत्साहित करता आ रहा है। चाहे पुराने नवाबों और राजाओं की सत्ता का टूटना हो या आज़ादी से पहले हिन्दुस्तानियों का अँग्रेज़ों के प्रति रोष या फिर दलितों का गाँव को छोड़ शहर की तरफ़ पलायन। हर दौर में समानता का मसला अहम रहा है। मानव के हज़ारों सालों के इतिहास के दौरान, समय के साथ इस महत्त्वपूर्ण विचार में आए ऐसे बदलावों के क्रम और कारणों को लेखक ने इस लेख में टटोला है।

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