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अध्यापन और नव-उदारवादी राज्य

कुमार, कृष्ण

FormatEbook
Published2011
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख इस बात से शुरू होता है कि ‘नव-उदारवाद’ शब्द हमारे भीतर गुस्सा क्यों उत्पन्न करता है। फिर यह बात करता है कि किस प्रकार नव-उदारवादी शासन की छत्र-छाया में शैक्षिक संस्थानों को बाज़ार के नियमानुसार चलाए जा सकने के विचार को ठीक मानने के चलन ने जोर पकड़ा है। इसमें नव-उदारवाद के उद्देश्यों, शिक्षा के लिए इसके निहितार्थों और इसके परिणामों के बारे में भी बात की गई है। लेख यह भी बताता है कि कैसे उदारवाद के व्यापक ऐतिहासिक सन्दर्भ और इस विचार ने शिक्षा के चरित्र को बदल दिया है।

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