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योग्यता का समाजशास्त्रीकरण

मदान, अमन

FormatEbook
Published2007
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह आलेख योग्यता का समाजशास्त्रीय और ऐतिहासिक नज़रिए से परीक्षण करता है और उन सामाजिक प्रक्रियाओं की पड़ताल करता है जिनसे मानवीय क्षमताएँ योग्यता में बदलती हैं। योग्यतातन्त्र का विचार मूलतः जाति जैसे जन्मजात विशेषाधिकारों के विरोध में समता के पक्ष में उभरा लेकिन उसे प्रायः असमानता को जायज़ ठहराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें योग्यता के बारे में पारसन्स से लेकर बोर्दू तक के समाजशास्त्रीय साहित्य की समीक्षा की गई है और यह दर्शाया गया है कि शिक्षा तक असमान पहुँच, वर्चस्व वाली संस्कृतियों की पक्षधर पाठ्यचर्या और विद्यार्थियों पर मुहर लगाने जैसे शिक्षकों के व्यवहार वास्तव में योग्यता को तय करते हैं। अन्‍त में योग्यता पर पुनर्विचार का आग्रह है।

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