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स्वतंत्रता के बाद के भारत में शिक्षा और समाज : भविष्य की ओर दृष्टि
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About this book
यह लेख शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य में तीन दीर्घकालिक प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालता है— प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट; संसाधनों का असमान उपयोग कर समाज के सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से प्रभावशाली वर्गों द्वारा उच्च शिक्षा के ज़रिए राज्य मशीनरी पर पकड़ मज़बूत करना; और व्यवस्था में अन्तर्निहित विभाजन, जो वर्ग-हितों की रक्षा करता है। शिक्षा सम्बन्धी ऐतिहासिक आँकड़ों का इस्तेमाल करते हुए, शिक्षा पर नई आर्थिक नीतियों का प्रभाव और भावी परिवर्तनों के साथ-साथ सहभागी लोकतंत्र के विकास की सम्भावना पर भी यह लेख विस्तार से बात करता है।साथ ही इस लेख में सामाजिक न्याय और सामूहिक आत्म-पहचान के मुद्दों पर भी विचार हुआ है।
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