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शिक्षा, बाज़ार का विकास और सामाजिक टकराव

मदान, अमन

FormatEbook
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह अध्याय पारस्परिक आदान-प्रदान से बाज़ार आधारित आदान-प्रदान वाले परिवर्तन के कारण सामाजिक जाति जैसे रिश्तों के लिए उसके निहितार्थ पर प्रकाश डालता है। शिक्षा के लिए श्रम के जिन्सीकरण के निहितार्थों पर विचार करते हुए इस लेख में कहा गया है कि गरीब श्रमिकों के लिए शिक्षा अब केवल उच्च संस्कृति तक पहुँच बनाने का साधन न रहकर विविध पेशों तक पहुँचने का ज़रिया भी है। लेखक का कथन है कि जिन्सीकरण एक ओर एक तरह की समानता को तो बढ़ावा देता है लेकिन दूसरी ओर जिनके पास पैसे अधिक हैं उनकी तरफ़दारी करता है। अतः शिक्षा को बाज़ारी ताकतों को खुले हाथ देना गरीबों तथा सामाजिक न्याय के हितों के खिलाफ़ जा सकता है।

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