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भाषा, स्वचेतना, तर्क और इन्सान

धनकर, रोहित

FormatEbook
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख, स्वचेतना, तर्क और भाषा के सम्बन्ध को टटोलता है और इनके सम्बन्ध को समझने व शिक्षण के लिए इसके निहितार्थ पर प्रकाश डालता है। इन्सानों में स्वचेतना होने का कारण भाषा को माना जा सकता है क्योंकि भाषा इन्सानों को ‘यहाँ और अब’ व ‘कार्य-कारण’ के बन्धन से मुक्त करती है, फिर भी स्वचेतना, भाषा और तर्क के बीच सम्बन्ध की प्रकृति क्या है, इसका क्या स्वरूप है, यह कहना मुश्किल है। लेख भाषा, तर्क और गणित के रिश्ते के बारे में भी चर्चा करता है।

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